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दो दिन का ये मेला - Do Din Ka Ye Mela (Rahul Ram, Tochi Raina, Gulabo Sitabo)

Movie/Album: गुलाबो सिताबो (2020) Music By: अनुज गर्ग Lyrics By: दिनेश पंत Performed By: राहुल राम, तोची रैना दो दिन का ये मेला है दो दिन का दो दिन का ये मेला है खेला फिर उठ जाना है अरे दो दिन का ये मेला है खेला फिर उठ जाना है आना है, जाना है जीवन चलते जाना है हो आना है, जाना है जीवन चलते जाना है मिटे ना छप के शहद सा टपके मिठे ना छप के शहद सा टपके मीठा बोल खज़ाना है आना है, जाना है जीवन चलते जाना है माटी का बर्तन है प्यारे माटी में मिल जाना है आना है जाना है... हवाओं में बहती कहानियाँ हैं हो, हवाओं में बहती कहानियाँ हैं भोली मासूम नादानियाँ है भोर और साँझ के पक्के रंग पूजा अज़ान दुआओं के संग घर-घर की छत पे रहता पंछियों का अब दाना है आना है जाना है...

बुढ़ऊ - Budhau (Bobby Cash, Bhanwari Devi, Gulabo Sitabo)

Movie/Album: गुलाबो सिताबो (2020) Music By: अनुज गर्ग Lyrics By: दिनेश पंत Performed By: बॉबी कैश, भंवरी देवी फटी अचकन के धागों पे लटके बुढ़ऊ साँसें अटकी हैं फिर भी देखो ना सुधरे बुढ़ऊ फटी अचकन के धागों पे लटके बुढ़ऊ साँसें अटकी हैं फिर भी देखो ना सुधरे बुढ़ऊ खटके ज़माने की आँखों में उलझे गठरी की गाँठों में नुक्कड़ पे बाज़ारों में सैर सपाटा करे फटी अचकन के धागों पे... खाली थाली में गाली परोसे बातों में दुनाली अठन्नी रुपे का कमाए निवाला नखरे बेमिसाली इसकी कमरिया लचकती नज़रिया मटकती और मटके बुढ़ऊ फटी अचकन के धागों पे... ना कोई समझा क्या ये चीज़ है बुढ़ऊ इसकी बदतमीज़ी में थोड़ी सी तमीज़ है रग-रग में इसकी कारस्तानी है खुद न सोए और नींदों को सुलाए चले ये तो ख्वाबों को ओढ़े बिछाए चले छुपा दाढ़ी में तिनका घूमे अड़ियल बुढ़ऊ फटी अचकन के धागों को बुन ले बुढ़ऊ साँसें अटकी हैं अब तो संभल जा दढ़ियल बुढ़ऊ सुधर जा बुढ़ऊ ओह हो बुढ़ऊ अड़ियल बुढ़ऊ Reprise हो फटी अचकन के धागों पे लटके बुढ़ऊ साँस अटकी है फिर भी देखो ना सुधरे बुढ़ऊ खटके ज़मानों की आँखों में उलझे गठरियों की गाँठों में गली-गली नुक्कड़ पे बाज़ारों में सैर सपाटा करे हो फटी...

मदारी का बंदर - Madari Ka Bandar (Tochi Raina, Anuj Garg, Gulabo Sitabo)

Movie/Album: गुलाबो सिताबो (2020) Music By: अनुज गर्ग Lyrics By: दिनेश पंत Performed By: तोची रैना, अनुज गर्ग बन के मदारी का बंदर डुगडुगी पे नाचे सिकंदर बन के मदारी का बंदर डुगडुगी पे नाचे सिकंदर खन खन खनके गिनती के सिक्के साँसों की टकसाल में मोह माया ने उलझाया किस फरेबी जाल में खारे पानी में ढूँढे मीठा समंदर अरे बन के मदारी का बंदर... कीमत लगेगी ठाठ बाट की एक बार चढ़नी है हांडी ये काठ की कैसा करतब है, जाने क्या कब है उंगली पे झूले नटनी घाट-घाट की चढ़ा है जो सुरूर ये मरघट के जमघट में पल में उतर जायेगा मिलता है जब वो कलंदर डुगडुगी पे नाचे सिकंदर बन के मदारी का बंदर... साहेब को ज़िंदगी ने झटका दिया लंगोटी से बाँधा और लटका दिया साहेब को ज़िंदगी ने झटका दिया लंगोटी से बाँधा और लटका दिया मचेगा ऐसा हुल्लड़ बचेगा थोक ना फुटकर लूटेगी बैरी बन के खड़ा ना हो तू तन के अरे हँस ले पगले थोड़ा सा क्या रखा रोने में लट्टू घूमें जंतर मंतर जादू टोने में दो गज़ जमीन पूछे कितने सवाल हैं दो गज़ जमीन पूछे कितने सवाल बन के मदारी का बंदर...