Posts

Showing posts with the label Ankit Tiwari

तुम से ही - Tum Se Hi (Ankit Tiwari, Leena Bose, Sadak 2)

Movie/Album: सड़क 2 (2020) Music By: अंकित तिवारी Lyrics By: शब्बीर अहमद Performed By: अंकित तिवारी, लीना बोस दो दिल सफ़र में निकल पड़े जाना कहाँ क्यूँ फ़िकर करे कहाँ ठिकाना हो रात का सुबह कहाँ पे बसर करे खोया खोया दिल मेरा कहता है हाँ तुम से ही बस तुम से ही मेरी जान है बस तुम से ही दिल को मेरे आराम है परेशान है बस तुम से ही जो दर्द को सुकून दे वो दर्द तुम से मिलता है ऐ दिल ज़रा इतना बता क्यूँ इश्क़ उन से होता है साँसों को अब जीने का जैसे सहारा मिल गया खोया खोया दिल मेरा कहता है तुम से ही बस तुम से ही... आशिक़ी होती है क्या दिल को मेरे मालूम न था एक भी तेरी तरह चेहरा कोई मासूम न था हो यूँ लगा इस जान में इक जान से दो खिल गए अब तो हर लम्हा मुझसे कहता है हाँ हाँ तुम से ही बस तुम से ही...

फिर ना मिलें कभी - Phir Na Milen Kabhi (Ankit Tiwari, Malang)

Movie/Album: मलंग (2020) Music By: अंकित तिवारी Lyrics By: प्रिंस दुबे Performed By: अंकित तिवारी अब के गए घर से जो तेरे फिर ना लौट आऊँगा तू भी मुझे भूल जाना मैं भी भूल जाऊँगा अब के गए घर से... चलते-चलते करता सलाम आख़िरी रब से अब तो मांगूँ बस दुआ यही हम फिर ना मिलें कभी हम फिर ना मिलें कभी हम फिर ना मिलें कभी फिर ना मिलें कभी फिर ना मिलें मिलते-मिलते हम तेरे ना हो जाएँ मुझ को डर है मेरे ग़म कम ना हो जाएँ अनजाने हैं दोनों, यारम ना हो जाएँ जी ना सकूँ तन्हा, ये आलम ना हो जाए अच्छी है मेरे लिए तेरी कमी तू आसमाँ है और मैं हूँ ज़मीं हम फिर ना मिलें कभी... एहसास ना हुआ के, जुदा होने लगे देखो हँसते-हँसते, हम रोने लगे क्यूँ बेवजह मैंने, इस इश्क को छुआ पागलपन था मेरा, वो जो कुछ भी हुआ तेरी गली में मुझको जाना नहीं तू याद मुझको अब आना नहीं हम फिर ना मिलें कभी...

मैं वो रात हूँ - Main Woh Raat Hoon (Ankit Tiwari, Commando 3)

Movie/Album: कमांडो 3 (2019) Music By: मनन शाह Lyrics By: अभेन्द्र कुमार उपाध्याय Performed By: अंकित तिवारी मैं वो रात हूँ, वो हालात हूँ जिसकी ना है दूर-दूर अब तो सुबह कोई मैं तो शोर हूँ, पर चुपचाप हूँ मुझसे कोई खाली नहीं देखो जगह कोई सुन ले, मेरी आँखों की ज़मीं पे दे ना दिखाई कुछ नमी से कोई तो जाने मेरी बेबसी, बेबसी, ओ ओ सुन ले, मेरा सूरज भी गलती से डूबा मेरी खिड़की पे कहाँ से आएगी हाँ रौशनी, रौशनी हो हाँ दिन में ही शाम सी है थोड़ी थकान सी है हारा नहीं हूँ मैं अब तलक तो मैं उठ के फिर खड़ा हूँ देखो हाँ मेरे हाथों की लकीरें तेरे हाथों में बची हैं कोई क्या मिटाएगा आ के इनको मेरे हाथों में रहेंगी तो फिर, दर्द सारे ये दबा के ज़िद को ज़िद्दी बना के अब रहूँगा नहीं चुप मैं, चुप मैं, ओ ओ तो फिर साँसें ज़ख्मी बना के हँसूँ मैं आँसुओं की खा के अब लड़ूँगा यहाँ भी खुद मैं, खुद मैं, ओ