Posts

Showing posts with the label 1950s

सारे जहां से अच्छा - Sare Jahan Se Achha (Asha Bhosle, Bhai Bahen)

Movie/Album: भाई बहन (1959) Music By: एन दत्ता Lyrics By: राजा मेहदी अली खान Performed By: आशा भोंसले सारे जहां से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा हम बुलबुलें हैं इसकी, ये गुलिस्ताँ हमारा सारे जहां से अच्छा... परबत हैं इसके ऊँचे, प्यारी है इसकी नदियाँ आगोश में इसी की, गुज़री हज़ारों सदियाँ हँसता है बिजलियों पर, ये आशियाँ हमारा हम बुलबुले हैं इसकी... वीरान कर दिया था, आंधी ने इस चमन को देकर लहू बचाया, गांधी ने इस चमन को रक्षा करेगा इसकी, हर नौजवाँ हमारा हम बुलबुले हैं इसकी... आवाज़ दे रहा है, ये हिन्द का पुजारी ये जंग और लड़ाई, हमको नहीं है प्यारी क्या कह रहा है देखो, कौम-ए-निशाँ हमारा हम बुलबुले हैं इसकी...

चल उड़ जा रे पंछी - Chal Ud Ja Re Panchhi (Md.Rafi, Bhabhi)

Movie/Album: भाभी (1957) Music By: चित्रगुप्त Lyrics By: राजेन्द्र कृष्ण Performed By: मो.रफी चल उड़ जा रे पंछी कि अब ये देश हुआ बेगाना चल उड़ जा रे पंछी... खत्म हुए दिन उस डाली के जिस पर तेरा बसेरा था आज यहाँ और कल हो वहाँ ये जोगी वाला फेरा था सदा रहा है इस दुनिया में किसका आबो-दाना चल उड़ जा रे पंछी... तूने तिनका-तिनका चुन कर नगरी एक बसाई बारिश में तेरी भीगी काया धूप में गर्मी छाई ग़म ना कर जो तेरी मेहनत तेरे काम ना आई अच्छा है कुछ ले जाने से देकर ही कुछ जाना चल उड़ जा रे पंछी... भूल जा अब वो मस्त हवा वो उड़ना डाली-डाली जब आँख की काँटा बन गई चाल तेरी मतवाली कौन भला उस बाग को पूछे हो ना जिसका माली तेरी क़िस्मत में लिखा है जीते जी मर जाना चल उड़ जा रे पंछी... रोते हैं वो पँख-पखेरू साथ तेरे जो खेले जिनके साथ लगाये तूने अरमानों के मेले भीगी आँखों से ही उनकी आज दुआयें ले ले किसको पता अब इस नगरी में कब हो तेरा आना चल उड़ जा रे पंछी...

न मिलता ग़म तो - Na Milta Gham To (Lata Mangeshkar, Amar)

Movie/Album: अमर (1954) Music By: नौशाद अली Lyrics By: शकील बदायुनी Performed By: लता मंगेशकर हो, तमन्ना लुट गई फिर भी तेरे दम से मोहब्बत है मुबारक ग़ैर को ख़ुशियाँ मुझे ग़म से मोहब्बत है न मिलता ग़म तो बरबादी के अफ़साने कहाँ जाते अगर दुनिया चमन होती तो वीराने कहाँ जाते चलो, अच्छा हुआ अपनों में कोई ग़ैर तो निकला अगर होते सभी अपने तो बेगाने कहाँ जाते... दुआएँ दो, मोहब्बत हमने मिटकर तुमको सिखला दी न जलती शम्मा महफ़िल में तो परवाने कहाँ जाते अगर दुनिया चमन... तुम्हीं ने ग़म की दौलत दी बड़ा एहसान फ़रमाया ज़माने भर के आगे हाथ फैलाने कहाँ जाते न मिलता ग़म तो...

मोहब्बत तर्क की - Mohabbat Tark Ki (Talat Mahmood, Do Raha)

Movie/Album: दो राहा (1952) Music By: अनिल बिस्वास Lyrics By: साहिर लुधियानवी Performed By: तलत महमूद मोहब्बत तर्क की मैंने, गरेबाँ सी लिया मैंने ज़माने अब तो ख़ुश हो, ज़हर (ये) भी पी लिया मैंने अभी ज़िन्दा हूँ लेकिन, सोचता रहता हूँ ये दिल में कि अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैंने मोहब्बत तर्क की मैंने तुझे अपना नहीं सकता, मगर इतना भी क्या कम है कि कुछ घड़ियाँ तेरे ख़्वाबों में खो कर जी लिया मैंने मोहब्बत तर्क की मैंने बस अब तो मेरा दामन छोड़ दो बेकार उम्मीदों बहुत दुःख सह लिये मैंने, बहुत दिन जी लिया मैंने मोहब्बत तर्क की मैंने