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रिमझिम के तराने ले के - Rimjhim Ke Tarane Le Ke (Md.Rafi, Geeta Dutt, Kala Bazar)

Movie/Album: काला बाज़ार (1960) Music By: एस.डी.बर्मन Lyrics By: शैलेन्द्र Performed By: मो.रफ़ी, गीता दत्त रिमझिम के तराने ले के आई बरसात याद आये किसी से वो पहली मुलाक़ात रिमझिम के तराने... भीगे तनमन पड़े रस की फुहार प्यार का संदेसा लाई बरखा बहार मैं ना बोलू आँखे करे अँखियों से बात रिमझिम के तराने... सुन के मतवाले काले बादलों का शोर रुमझुम, घुमघुम नाचे मन का मोर सपनों का साथी चल रहा है मेरे साथ रिमझिम के तराने... जब मिलते हो तुम तो छिड़ते हैं दिल के तार मिलने को तुमसे मैं क्यूँ था बेकरार रह जाती हैं क्यों होठों तक आ के दिल की बात रिमझिम के तराने...

सारे जहां से अच्छा - Saare Jahan Se Achchha (Sona Thakur, Apna Ghar)

Movie/Album: अपना घर (1960) Music By: रवि Lyrics By: अल्लामा इकबाल Performed By: सोना ठाकुर सारे जहां से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा हम बुलबुलें हैं इसकी, ये गुलिस्ताँ हमारा सारे जहां से अच्छा... परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमाँ का वो संतरी हमारा, वो पासबाँ हमारा सारे जहां से अच्छा... गोदी में खेलती हैं, जिसकी हज़ारों नदियाँ गुलशन है जिसके दम से, रश्क-ए-जिनाँ हमारा सारे जहां से अच्छा... मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना हिन्दी हैं हम, वतन है, हिन्दोस्ताँ हमारा सारे जहां से अच्छा... अतिरिक्त ग़ुरबत में हों अगर हम, रहता है दिल वतन में समझो वहीं हमें भी, दिल हो जहाँ हमारा सारे जहां से अच्छा... ऐ आब-ए-रूद-ए-गंगा, वो दिन है याद तुझको उतरा तेरे किनारे, जब कारवाँ हमारा सारे जहां से अच्छा... यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रोमा, सब मिट गए जहां से अब तक मगर है बाकी, नाम-ओ-निशाँ हमारा सारे जहां से अच्छा... कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-जहां हमारा सारे जहां से अच्छा... 'इक़बाल' कोई महरम, अपना नहीं जहां में मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहाँ हमारा सारे जहां से अच्छा...

बेक़सी हद से जब - Beqasi Had Se Jab (Asha Bhosle, Kalpana)

Movie/Album: कल्पना (1960) Music By: ओ.पी.नय्यर Lyrics By: जाँ निसार अख़्तर Performed By: आशा भोसले बेक़सी हद से जब गुज़र जाए कोई ऐ दिल जिए के मर जाए ज़िन्दगी से कहो दुल्हन बन के आज तो दो घड़ी सँवर जाए कोई ऐ दिल... उनको जी भर के देख लेने दे दिल की धड़कन ज़रा ठहर जाए कोई ऐ दिल... हम हैं ख़ुद अपनी जान के दुश्मन क्यूँ ये इल्ज़ाम उनके सर जाए कोई ऐ दिल... मेरे नगमों से उनका दिल न दुखे ग़म नहीं मुझ पे जो गुज़र जाए कोई ऐ दिल...

लगता नहीं है दिल मेरा - Lagta Nahin Hai Dil Mera (Md.Rafi, Lal Qilla)

Movie/Album: लाल क़िला (1960) Music By: एस.एन.त्रिपाठी Lyrics By: बहादुरशाह ज़फर Performed By: मो.रफ़ी लगता नहीं है दिल मेरा उजड़े दयार में किस की बनी है आलम-ए-ना-पायेदार में कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दाग़दार में उम्र-ए-दराज़ माँग के लाए थे चार दिन दो आरज़ू में कट गये, दो इंतज़ार में इतना है बदनसीब 'ज़फ़र' दफ़्न के लिये दो गज़ ज़मीन भी न मिली कू-ए-यार में लगता नहीं है दिल मेरा उजड़े दयार में