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मन में शिवा - Mann Mein Shiva (Kunal Ganjawala, Deepanshi, Padmanath, Panipat)

Movie/Album: पानीपत (2019) Music By: अजय-अतुल Lyrics By: जावेद अख्तर Performed By: कुणाल गांजावाला, दीपांशी नागर, पदमनाभ गायकवाड़ चमके सितारे देखो हमारे शत्रु तो सारे हारे जय हो हम वो सिपाही जो है सदा ही रूप शिवा का धारे जय हो हे आज अंधेरे छटे हैं कम हुए हैं घटे हैं कल जो दुश्मन यहाँ थे आज पीछे हटे हैं गाती ये धरती है गाता ये अम्बर है गाती है सारी हवा तेरे मन में शिवा मेरे मन में शिवा साँसों में शिवा प्राणों में शिवा हर घड़ी में शिवा हर दिशा में शिवा आज गूँजा हुआ है जय जय शिवा तेरे मन में शिवा... हर हर महादेव हर हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर हर हर महादेव सारी दीवारें भी सारी तलवारें भी तुमने दुश्मन की अब तोड़ दी हैं आई थी आँधियाँ जिस दिशा से यहाँ उस दिशा मोड़ दी है जीतना था हमें, हारना था उन्हें ये तो होना ही था, सुन ले भाऊ रात ढलनी ही थी दिन निकलना ही था ये तो होना था भाऊ हो अपना जीवन निराला है इसको हमने ही ढाला है वीरता की वो ज्वाला है जिसको सीने में पाला है कहती ये ज्वाला है कहता ये जीवन है कहता समय है सदा तेरे मन में शिवा... हाँ मर्द मराठी माटी चा छत्र...

मर्द मराठा - Mard Maratha (Ajay-Atul, Sudesh, Kunal, Swapnil, Padmanabh, Priyanka, Panipat)

Movie/Album: पानीपत (2019) Music By: अजय-अतुल Lyrics By: जावेद अख्तर Performed By: अजय-अतुल, सुदेश भोसले, कुणाल गांजावाला, स्वपनिल बांदोडकर, पदमनाभ गायकवाड, प्रियंका बर्वे हे बोले धरती जयकारा गगन है सारा गूँजा रे जग में लहराया न्यारा ध्वज है हमारा ऊँचा रे हम वो योद्धा वो निडर हम जो भी दिशा में जाएँ सारे पथ चरण छुएँ और पर्वत सीस नवाएँ रास्ते से हट जाएँ नदियाँ हो के हवाएँ हम हैं जियाले जीतने को हम रण में उतरते हैं हम सूरज हैं अंत हमी रातों का करते हैं युग-युग की ज़ंजीरों को हमने ही काटा रे बोल उठा ये जग सारा जय मर्द मराठा रे जो रक्त है तन में बहता वो हमसे है ये कहता सम्मान के बदले जान भी दें तो नहीं है घाटा रे युग-युग की ज़ंजीरों को... वीरता हमने बोई, और ये फल पाया दूर तक अब है फैली, अपनी ही छाया हो, जीवन जो रणभूमि में, करता है तांडव आज उसी ने है विजय का, नगाड़ा बजाया अपनी है जो गाथा, अब है समय सुनाता सब को है ये बताता, कैसे सुख हमने बाँटा रे युग-युग की ज़ंजीरों को... सच के सिपाही अलबेले राही क्या जानते हो तुम जब तुम नहीं थे, हम कब यहीं थे हम भी थे जैसे गुम तुम ध्यान में थे, तुम प्राण में थ...