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बेकराँ है बेकराँ - Bekaraan Hai Bekaraan (Vishal Bhardwaj, 7 Khoon Maaf)

Movie/Album: 7 खून माफ़ (2011) Music By: विशाल भारद्वाज Lyrics By: गुलज़ार Performed By: विशाल भारद्वाज बेकराँ है बेकराँ, आँखें बंद कीजे ना डूबने लगे हैं हम, साँस लेने दीजे ना लिल्हा एक ज़रा चेहरा उधर कीजे, इनायत होगी आपको देख के बड़ी देर से मेरी साँस रुकी हैं बेकराँ है बेकराँ... एक ज़रा देखिये तो आपके पाँव तले कुछ तो अटका है कहीं, वक़्त से कहिये है चले उड़ती-उड़ती सी नज़र, मुझको छू जाये अगर एक तसलीन को हर बार मेरी आँख झुक है आपको देख के... आँख कुछ लाल-सी है, रात जागे तो नहीं रात जब बिजली गई, डर के भागे तो नहीं क्या लगा भूटकली, जैसे कोई चोट चले जाने क्या सोच के इस बार मेरी आँख झुके आपको देख के...

मचल के जब भी आँखों से - Machal Ke Jab Bhi Aankhon Se (Bhupinder Singh, Griha Pravesh)

Movie/Album: गृह प्रवेश (1979) Music By: कानू रॉय Lyrics By: गुलज़ार Performed By: भूपेंद्र सिंह मचल के जब भी आँखों से छलक जाते हैं दो आँसू सुना है आबशारों को बड़ी तक़लीफ़ होती है मचल के जब भी आँखों से... ख़ुदा-रा अब तो बुझ जाने दो इस जलती हुई लौ को चराग़ों से मज़ारों को बड़ी तक़लीफ़ होती है मचल के जब भी आँखों से... कहूँ क्या वो बड़ी मासूमियत से पूछ बैठे हैं क्या सचमुच दिल के मारों को बड़ी तक़लीफ़ होती है मचल के जब भी आँखों से... तुम्हारा क्या, तुम्हें तो राह दे देते हैं काँटे भी मगर हम ख़ाक-सारों को बड़ी तक़लीफ़ होती है मचल के जब भी आँखों से...

डार्लिंग आँखों से - Darling Aankhon Se (Rekha Bhardwaj, Usha Uthup, 7 Khoon Maaf)

Movie/Album: 7 खून माफ़ (2011) Music By: विशाल भारद्वाज Lyrics By: गुलज़ार Performed By: रेखा भारद्वाज, उषा उथुप हे डार्लिंग आँखों से आँखें चार करने दो रोको ना, रोको ना मुझको प्यार करने दो ये इश्क है बहारा बेचैन जाने-यारा बुलबुलों को अभी इंतज़ार करने दो डार्लिंग, आँखों से आँखें चार करने दो डार्लिंग! सॉरी तुझे सन्डे के दिन जहमत हुई डार्लिंग! मिलना तेरा फज़ल-ए-ख़ुदा रहमत हुई हे डार्लिंग, खादिम को दिल पे तो इख्त्यार करने दो डार्लिंग, आँखों से... डार्लिंग! छोड़ो ज़रा शर्माने का ये कायदा हे डार्लिंग! हैरत भी है खैरत भी है, क्या फायदा हे डार्लिंग, पब्लिक में सनसनी एक बार करने दो डार्लिंग, आँखों से...

सब झुलस गया - Sab Jhulas Gaya (Arijit Singh, Chhapaak)

Movie/Album: छपाक (2020) Music By: शंकर-एहसान-लॉय Lyrics By: गुलज़ार Performed By: अरिजीत सिंह एक पल तो था यहाँ एक पल में बस गया इक नज़र की आग से इक जहां झुलस गया इक जहां झुलस गया सब झुलस गया

खुलने दो - Khulne Do (Arijit Singh, Chhapaak)

Movie/Album: छपाक (2020) Music By: शंकर-एहसान-लॉय Lyrics By: गुलज़ार Performed By: अरिजीत सिंह मैली-मैली सी सुबह धुलने लगी है मैली-मैली सी सुबह धुलने लगी है गिरह लगी थी साँस में, खुलने लगी है खुलने लगी है बर्फ़ की डली थी कोई, घुलने लगी है गिरह लगी थी साँस में, खुलने लगी है खुलने लगी है खुलने दो, खुलने दो, आसमाँ खुलने दो खुलने दो, खुलने दो, आसमाँ खुलने दो उजाला हो तो जाएगा कहीं न कहीं से अँधेरा भी छटेगा ही कभी तो ज़मीं से पलकें तो नहीं हैं, नज़र उठने लगी है गिरह लगी थी साँस में...

नोक झोंक - Nok Jhok (Siddharth Mahadevan, Chhapaak)

Movie/Album: छपाक (2020) Music By: शंकर-एहसान-लॉय Lyrics By: गुलज़ार Performed By: सिद्धार्थ महादेवन बात बात पे कह देते हैं, नोक-झोंक बस नोक-झोंक, बस नोक-झोंक बात बात पे शह देते हैं, नोक-झोंक बस नोक-झोंक, बस नोक-झोंक पल पल चोंचे मारते रहना चुभती है पर हँसते रहना तागों में कोई गिरह नहीं पर बातों में फँसते रहना नोक-झोंक, बस नोक-झोंक बस नोक-झोंक... कितना कुछ तो कह लेते हैं लेकिन कुछ भी सुना नहीं है बोलती ही रहती हैं आँखें कहना है जो कहा नहीं है कहा नहीं है सीधे-सीधे रास्ते रूठे-रूठे लगते हैं कहना है जो, कहा नहीं है कहा नहीं है नोक-झोंक, बस नोक-झोंक... एक ही दर्द की छाँव तले कौन थे वो जो गले मिले उनमें कोई अजनबी था क्या साथ-साथ जो साथ चले कितना कुछ तो कह ही दिया है काफी कुछ अब सुन भी लिया है बोलने दो आँखों को आगे बाकी है कुछ बाकी है कुछ, कहा नहीं है कहा नहीं है रूठे-रूठे रास्ते नए-नए से लगते हैं बाकी है कुछ...

छपाक टाइटल ट्रैक - Chhapaak Title Track (Arijit Singh)

Movie/Album: छपाक (2020) Music By: शंकर-एहसान-लॉय Lyrics By: गुलज़ार Performed By: अरिजीत सिंह कोई चेहरा मिटा के और आँख से हटा के चंद छींटे उड़ा के जो गया छपाक से पहचान ले गया एक चेहरा गिरा, जैसे मोहरा गिरा जैसे धूप को ग्रहण लग गया छपाक से, पहचान ले गया ना चाह ना चाहत कोई ना कोई ऐसा वादा, हा हाथ में अँधेरा और आँख में इरादा कोई चेहरा मिटा के... बेमानी सा जुनून था बिन आग के धुआँ ना होश ना ख़याल सोच अंधा कुआँ कोई चेहरा मिटा के... आरज़ू थी शौक़ थे वो सारे हट गए कितने सारे जीने के तागे कट गए सब झुलस गया कोई चेहरा मिटा के एक चेहरा गिरा जैसे मोहरा गिरा जैसे धूप को ग्रहण लग गया छपाक से पहचान ले गया छपाक से पहचान...