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मचल के जब भी आँखों से - Machal Ke Jab Bhi Aankhon Se (Bhupinder Singh, Griha Pravesh)

Movie/Album: गृह प्रवेश (1979) Music By: कानू रॉय Lyrics By: गुलज़ार Performed By: भूपेंद्र सिंह मचल के जब भी आँखों से छलक जाते हैं दो आँसू सुना है आबशारों को बड़ी तक़लीफ़ होती है मचल के जब भी आँखों से... ख़ुदा-रा अब तो बुझ जाने दो इस जलती हुई लौ को चराग़ों से मज़ारों को बड़ी तक़लीफ़ होती है मचल के जब भी आँखों से... कहूँ क्या वो बड़ी मासूमियत से पूछ बैठे हैं क्या सचमुच दिल के मारों को बड़ी तक़लीफ़ होती है मचल के जब भी आँखों से... तुम्हारा क्या, तुम्हें तो राह दे देते हैं काँटे भी मगर हम ख़ाक-सारों को बड़ी तक़लीफ़ होती है मचल के जब भी आँखों से...

चाँद जैसे मुखड़े पे - Chand Jaise Mukhde Pe (Yesudas, Sawan Ko Aane Do)

Movie/Album: सावन को आने दो (1979) Music By: राजकमल Lyrics By: पुरुषोत्तम पंकज Performed By: येसुदास सब तिथियन का चन्द्रमा जो देखा चाहो आज धीरे-धीरे घूँघटा सरकावो सरताज चाँद जैसे मुखड़े पे बिन्दिया सितारा चाँद जैसे मुखड़े पे बिन्दिया सितारा नहीं भूलेगा मेरी जान ये सितारा वो सितारा माना तेरी नज़रों में मैं हूँ एक आवारा हो आवारा नहीं भूलेगा मेरी जान ये आवारा, वो आवारा सागर सागर मोती मिलते परबत परबत पारस तन मन ऐसे भीजे जैसे बरसे महुए का रस अरे कस्तूरी को खोजता फिरता है ये बंजारा, हो बंजारा नहीं भूलेगा मेरी जान ये बंजारा वो बंजारा चाँद जैसे मुखड़े पे बिन्दिया सितारा कजरारे चंचल नैनों में सूरज चाँद का डेरा रूप के इस पावन मन्दिर में हंसा करे बसेरा प्यासे गीतों की गंगा का तू ही है किनारा, हो किनारा नहीं भूलेगा मेरी जान ये किनारा वो किनारा चाँद जैसे मुखड़े पे...